जरी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

जरी ^१ वि॰ पुं॰ [सं॰ जरिन्] [वि॰ स्त्री॰ जरिणी] बुड़्ढा । वृद्ध ।

जरी पु ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ जड़ी] जडी । बूटी । उ॰—तब सो जरी अमृत लेइ आवा । जो मरे हुत तिन्ह छिरिकि जियावा ।— जायसी (शब्द॰) ।

जरी ^३ संज्ञा स्त्री॰ [फ़ा॰ जरी]

१. ताश नामक कपड़ा जो बादले से बुना जाता है ।

२. सोने के चारों आदि से बना हुआ काम ।

जरी ^४ वि॰ सोने का । स्वर्णिम । स्वर्णमय ।