जलना

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हिन्दी[सम्पादन]

क्रिया[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

जलना क्रि॰ अ॰ [सं॰ ज्वलन]

१. किसी पदार्थ का अग्नि के संयोग से अंगारे या लपट के रूप में हो जाना । दग्ध होना । भस्म होना । बलना । जैसे, लकड़ी जलना, मशाल जलना, घर जलना, दीपक जलना । यौ॰—जलता बलता=होलिकाष्टक या पितृपक्ष का कोई दिन जिसमें कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता । मुहा॰—जलती आग=भयानक विपत्ति । जलती आग में कूदना=जान बूझकर भारी विपत्ति में फँसना ।

२. किसी पदार्थ का बहुत गरमी या आँच के कारण भाफ या कोयले आदि के रूप में हो जाना । जैसे, तवे पर रौटी जलना, कड़ाही में घी जलना, धूप में घास या पौधे का जलना ।

३. आँच लगने के कारण किसी अंग का पीड़ित और विकृत होना झुलसना । जैसे, हाथ जलना । मुहा॰—जले पर नमक छिड़कना या लगाना=किसी दुःखी या व्याथित मनुष्य को और अधिक दुःख या व्यथा पहुँचाना ।