ज्वर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ज्वर में दिया जाता है । पत्तियाँ इसकी रेचक हैं । पत्ती और फूल के रस की नास लेने से बिनास फूटना, सिर दर्द और ज्वर अच्छा होता है । आँखों में फूल का रस डालने से ज्योति बढ़ति है । इसके फूलों की तरकारी और अचार भी बनाता है ।

४. शिव का एक नाम [को॰] ।

ज्वर संज्ञा पुं [सं॰]

१. शरीर की वह गरमी या ताप जो स्वाभाविक से अधिक हो और शरीर की अवस्थता प्रकट करे । ताप । बुखार ।