टकसाल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

टकसाल संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ टङ्कशाला]

१. वह स्थान जहाँ सिक्के बनाए या डाले जाते हैं । रुपए पैसे आदि का कार्यालय । मुहा॰—टकसाल का खोटा = नीच । दुष्ट । कमीना । कम असज अशिष्ट । टकसाल के चट्टे बट्टे = टकसाल में ढले हुए । विशिष्ट प्रकृति के । उ॰—राज्य के अधिकारी तो वही पुरानी टकसाल के चट्टे बट्टे थे ।—किन्नर॰, पृ॰ २५ । टकसाल चढ़ना = (१) टकसाल में परखा जाना । सिक्के या धातु- खंड की परीक्षा होना । (२) किसी विद्या या कला कौशल में दक्ष माना जाना । पारंगत माना जाना । (३) बुराई में अम्यस्त होना । कुकर्म या दुष्टता में परिपक्व, होना । बदमाशी में पक्का होना । निर्लज्ज होना । टकसाल बाहर = (१) (सिक्का) जो राज्य की टकसाल का न होने के कारण प्रामाणिक न माना जाय । जो प्रचार में न हो । (२) (वाक्य या शब्द) जो प्रामाणिक न माना जाय । जिसका प्रयोग शिष्ट न माना जाय ।

२. जँची या प्रामाणिक वस्तु । असल चीज । निर्दोष वस्तु ।