टाँयटाँय

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

टाँयटाँय संज्ञा स्त्री॰ [अनु॰]

१. कर्कश शब्द । अप्रिय शब्द । कडुई बोली । टें टें ।

२. बक बक । बकवाद । प्रलाप । मुहा॰—टाँय टाँय करना = बगवाद करना । निरर्थक बोलना । निना समझे बूझे बोलना । उ॰—तुम कुछ समझते तो हो नहीं बेकार टाँय टाँय करते हो ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ ११५ । टाँय टाँय फिस = (१) बकवाद, पर फज कुछ नहीं । किसी कार्य के संबंध में बातचीत तो बहुत बढ़कर पर परिणाम कुछ नहीं । (२) किसी कार्य के आरंभ में तो बड़ी भारी त्पतरता पर अंत में सिद्धि कुछ भी नहीं । कार्य का आरंभ तो बड़ी धूमधाम के साथ, पर अंत को होना जाना कुछ नहीं ।