ठनक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठनक संज्ञा स्त्री॰ [अनुध्व॰ ठन ठन]

१. मृदंगादि की ध्वनि । चमड़े से मढ़े बाजे पर आघात पड़ने का शब्द । उ॰—खनक चुरीन की त्यौ ठनक मृदंगन की रुनुक झुनुक सुर नूपुर के जाल को ।— पद्माकर (शब्द॰) ।

२. रह रहकर आघात पड़ने की सी पीड़ा । टीस । चसक ।

३. धातुखंड़ पर आघात होने से उत्पन्न शब्द । ठन । मुहा॰—ठनककर बोलना = कड़ी आवाज में कुछ कहना । उ॰—सिंह ठवनि होए बोले ठनकि के, रन जीते फिरि आवै ।—सं॰ दरिया, पृ॰ ११५ ।