ठाँव

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठाँव संज्ञा स्त्री॰, पुं॰ [सं॰ स्थान, प्रा॰ ठान] स्थान । जगह । ठिकाना । उ॰—(क) निडर, नीच, निर्गुन निर्धन कहँ जग दूसरों न ठाकुर ठाँव ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) नाहिन मेरे और कोउ बलि चरन कमल बिनु ठाँव ।—सूर (शब्द॰) । विशेष—इस शब्द का प्रयोग प्रायः सब कवियों ने पुं॰ किया है और अधिक स्थानों में पुं॰ ही बोला जाता हैं पर दिल्ली मेरठ आदि पश्चिमी जिलों में इसे स्त्री॰ बोलते हैं ।

२. अवसर । मौका । उ॰—इहै ठाँव हौं बारति रही ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ ८४ ।

३. रुकने या टिकने का स्थान । ठहराव । उ॰—चार कोस लै गाँव, ठाँव एको नहीं ।—घरनी॰ श॰, पृ॰ ४५ ।

ठाँव संज्ञा स्त्री॰, पृं॰ [हिं॰]दे॰ 'ठाँव' ।