ठाना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठाना † ^१पु क्रि॰ स॰ [हिं॰ ठान]

१. ठानना । द्दढ़ संकल्प के साथ आरंभ करना । छेड़ना । करना । उ॰—काहे को सोहैं हजार करो तुम तो कबहुँ अपराध न ठायो ।—मतिराम (शब्द॰) ।

२. मन में ठहराना । निश्चित करना । दृढ़ता— पूर्वक चित्त में धारण करना । पक्का विचार करना । उ॰— विश्वामित्र दुःखी ह्वै तँह पुनि करन महा तप ठायो ।—रघुराज (शब्द॰) । वि॰ दे॰ 'ठयना' ।

३. स्थापित करना । रखना । धरना । उ॰—मुरली तऊ गोपालहि भावति । अति आधीन सुजान कनौठे गिरिधर नार नवावति । आपुन पौढ़ि अधर सज्या पर करपल्लव पदपल्लव ठावति ।—सूर (शब्द॰) ।