ठाली

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठाली †पु ^१ वि॰ [देशी॰ ठलिय (=रिक्त); वा हिं॰ निठल्ला]

१. खाली । जिसे कुछ काम धंधा न हो । निठल्ला । बेकाम । उ॰—(क) ऐसी को ठाली बैठी है तोसों मूड़ चरावै । झूठी बात तुसी सी बिनु कन फरकत हाथ न आवै ।—सूर (शब्द॰) । (ख) ठाली ग्वालि जानि कठए अलि कह्यो पछोरन छूछो ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) प्लेटफार्म पर ठाली बैठे समय की बरबादी अनुभव करने लगे ।—भस्मा॰, पृ॰ ४३ ।

ठाली †पु संज्ञा स्त्री॰ [?] ढा़रस । भरोसा । आश्वासन । उ॰— कहा कहौं आलौ खाली देत सब ठाली, पर मेरे बनमाली कौ न काली ते छुड़ावहीं ।—रसखान॰; पृ॰ ३० ।