ठीढ़ी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठीढ़ी ठाढ़ी पु वि॰ [सं॰ स्थिति+ स्थ] जिस हालत में हो उसी में स्थित । स्पंदनहीन । निश्चेष्ट । उ॰—सजि सिंगार कुंजन गई लह्यौ नहीं बलबीर । ठीढ़ी ठाढ़ी सी तरुन बाढ़ी गाढ़ी पीरं ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३८९ ।