डहकाना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

डहकाना ^१ क्रि॰ स॰ [सं॰ दस ( = खोना), हिं॰ डाका] खोना गँवाना । नष्ट कराना । उ॰—वाद विवाद यज्ञ ब्रत साधै । कतहूँ जाय जन्म डहकावै ।—सूर (शब्द॰) ।

डहकाना ^२ क्रि॰ अ॰ किसी के धोखे में आकर अपने पास का कुछ खोना । किसी के छल के कारण हानि सहना । धोखे में आना वंचित या प्रतारित होना । ठगा जाना । जैसे, इस सौदे में तुम डहका गए । उ॰—(क) इनके कहे कौन डहकावै, ऐसी कौन अजानी?—सूर (शब्द॰) । (ख) डहके ते डहकाइबो भलो जो करिय बिचार ।—तुलसी (शब्द॰) । संयो॰ क्रि॰—जाना ।

डहकाना ^३ क्रि॰ स॰

१. ठगना । धोखे से किसी की कोई वस्तु ले लेना । धोखा देना । जटना ।

२. किसी को कोई वस्तु देने के लिये दिखाकर न देना । ललचाकर न देना ।