डहना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

डहना ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ डयन] दे॰ 'डैना' । उ॰—जैं पंखी कहवाँ थिर रहना । ताकै जहाँ जाइ जौं डहना ।—पदमावत, पृ॰ २५८ ।

डहना ^२ क्रि॰ अ॰ [सं॰ दहन]

१. जलना । भस्म होना ।

२. कुढ़ना । चिढ़ना । द्वेष करना । बुरा मानना ।

डहना ^३ क्रि॰ स॰

१. जलाना । भस्म कराना । उ॰—रावन लंका हौ डही वेई मोहि डाढ़न आइ ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. संतप्त करना । दुःख पहुँचाना । उ॰—डहइ चंद अउ चंदन चीरू । दगध करइ तन विरह बधीरू ।—जायसी (शब्द॰) ।

३. ताड़ना । बजाना । उ॰—डहरू अंकर डहै करैं जोवण किलकाराँ ।—रघु॰, रू॰, पृ॰ ४७ ।