ढास

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ढास † संज्ञा पुं॰ [सं॰ दस्यु] ठग । लुटेरा । डाकू । उ॰— बासर दासनि के ढका, रजनी चहुँ दिसी चोर । संकर निज पुर राखिए, चितै सुलोचन कोर ।—तुलसी ग्रं, पृ॰ १२२ ।