ढिग

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ढिग ^१ क्रि॰ वि॰ [सं॰ दिक् (= ओर)] पास । समीप । निकट । नजदीक । उ॰— मुरली धुनि सुनि सबै ग्वालिनी हरि के ढिग चलि आई ।— सूर (शब्द॰) । विशेष— यद्यपि यह संज्ञा शब्द है, तथापि, इसका प्रयोग सप्तमी विभक्ति का लोप करके प्रायः क्रि॰ वि॰ वत् ही होता है ।

ढिग ^२ संज्ञा स्त्री॰

१. पास । समीप्य ।

२. तट । किनारा । छोर । उ॰— सेतुबंध ढिग चढि रघुराई । चितव कृपालु, सिंधु बहुताई ।— तुलसी (शब्द॰) ।

३. कपड़े का किनारा । पाड़ । कोर । हाशिया । उ॰— (क) लाल ढिगन की सारी ताको पीत ओढ़निया कीनी ।—सूर (शब्द॰) । (ख) पट की ढिग कत ढाँपियत सोभित सुभग सुदेस । हद रद छद छवि देखियत संद रदछद की देख ।— बिहारी (शब्द॰) ।