ढीट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ढीट † संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] रेखा । लकीर । डँडीर । उ॰— रेख छाँड़ि जाऊँ तो हराऊँ लछि्मन जो तें भीख बिनु दिए भीख भीच हौं न पावती । कोऊ मंदभागी यह राम के न आगे आयो, दरसन पावत हों देत न सकावती । ढीट मेट देऊँ फिर ढीट ही मिलता लेऊँ, ह्वै है बात सीई भगवंत जू को भावती ।—हनुमान (शब्द॰) ।