तक्रसंधान

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तक्रसंधान संज्ञा पुं॰ [सं॰ तक्रसन्धान] वैद्यक के अनुसार एक प्रकार की काँजी । विशेष—इसे सौ टके भर छाछ में एक एक टके भर साँभर नमक, राई और हल्दी का चूर्ण डालकर बनाते हैं । यह काँजी पहले पंद्रह दिन पड़ी रहने दी जाती है, तब तैयार होती है । ऐसा कहते हैं कि यदि २१ दिनों तक यह नित्य दो दो टंक पी जाय तो तापतिल्ली अच्छी हो जाती है ।