तरस

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तरस ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ त्रस( = डरना) अथवा फा़॰ तर्स( = भय, डर, खौफ)] दया । करुणा । रहम । क्रि॰ प्र॰—आना । मुहा॰—(किसी पर) तरस खाना = दयार्द्र होना । दया करना । रहम करना । विशेष—इस शब्द का यह अर्थ विपर्यय द्वारा आया हुआ जान पड़ता है । जो मनुष्य भय प्रकाशित करता है, उसपर दया प्रायः की जाती है ।

तरस ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰] मांस [को॰] ।