तस्कर

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search
तस्कर

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तस्कर संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. चोर ।

२. श्रवण । कान ।

३. मैनफल । मदन वृक्ष ।

४. बृहत्संहिता के अनुसार एक प्रकार के केतु जो लंबे और सफेद होते हैं । ये ५१ हैं और बुध के पुत्र माने जाते हैं ।

५. चोर नामक गंधद्रव्य ।

६. कान (को॰) ।

तस्कर ।

४. मिथ्यावादी ।

५. कर्कश वचन बोलनेवाला ।

६. परस्त्रीगामी । विशेष—शास्त्रों में डाका, चोरी, झूठ बोलना, कठीर वचन कहना और परस्त्रीगमन ये पाँचो कर्म करनेवाले साहसिक कहे गए हैं और अत्यंत पापी बतलाए गए हैं । धर्मशास्त्रों में इन्हें य़थोचित दंड देने का विधान है । स्गृतियों में लिखा है कि 'साहसिक व्यक्ति' की साक्षी नहीं माननी चाहिए क्योंकि ये स्वयं ही पाप करनेवाले होते हैं ।

६. वह जो हठ करता हो । हठी । हठीला ।

७. निर्भीक । निर्भय । निडर ।

८. अविचारशील । अविवेकी (को॰) ।

९. क्रूर । अत्याचारी (को॰) ।