ताई

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ताई ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ ताप, हिं॰ ताय + ई (प्रत्य॰)]

१. ताप । हरारत । हलका ज्वर ।

२. जाड़ा देकर आनेवाला बुखार । जूड़ी । क्रि॰ प्र॰—आना ।

३. एक प्रकार की छिछली कड़ाही जिसमें मालपूआ, जलेबी आदि बनाते हैं ।

ताई ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ ताऊ का स्त्रीलिंग] बाप के बडे़ बाई की स्त्री । जेठी चाची ।

ताई पु ^३ अव्य॰ [सं॰ तावत् या फ़ा॰ ता] दे॰ 'ताईं'-३ । उ॰—भूत खानि में रहो समाई । सब जग जाने तेरे ताई ।— कबीर सा॰, पृ॰ १५१८ ।

ताई पु ^४ वि॰ [सं॰ तावत्] वही । उ॰—साजे सार छत्रीस सिपाई । त्यार हुआ मंडण ताई ।—रा॰ रू॰, पृ॰ ६५ ।