तारा

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संज्ञा[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तारा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. नक्षत्र । सितारा । यौ॰—तारामंडल । मुहा॰—तारे खिलना = तारों का चमकते हुए निकलना । तारों का दिखाई देना । तारे गिनना = चिंता या आसरे में बेचैनी से रात काटना । दुःख से किसी प्रकार रात बिताना । तारे छिटंकना = तारों का दिखाई पड़ना । आकाश स्वच्छ होना और तारों का दिखाई पड़ना । तारा टूटना = चमकते हुए पिंड का आकाश में वेग से एक ओर से दूसरी ओर को जाते हुए या पृथ्वी पर गिरते हुए दिखाई पड़ना । उल्कापात होना । तारा डूबना = (१) किसी नक्षत्र का अस्त होना । (२) शुक्र का अस्त होना । विशेष—शुक्रास्त में हिंदुओं के यहाँ मंगल कार्य नहीं किए तारे तोड़ लाना = (१) कोई बहुत ही कठिन काम कर दिखाना । (२) बड़ी चालाकी का काम करना । तारे दिखाना = प्रसूता स्त्री को छठी के दिन बाहर लाकर आकाश की ओर इसलिये तकाना जिसमें जिन, भूत आदि का डर न रह जाय । विशेष—मुसलमान स्त्रियों में यह रीति है । तारे दिखाई दे जाना = कमजोरी था दुर्बलता के कारण आँखों के सामने तिरमिराहट दिखाई पड़ना । तारा सी आँखें हो जाना = ललाई, पूजन, कीचड़ आदि दूर होने के कारण आँख का स्वच्छ हो जाना । तारों की छाँह = बड़े सबेरे । तड़के, जब कि तारों का धुँधला प्रकाश रहे । जैसे,—तारों की छाँह यहाँ से चल देंगे तारा हो जान = (१) बहुत ऊँचे पर हो जाना । इतनी ऊँचाई पर पहुँच जाना कि तारे की तरह छोटा दिखाई दे । (२) इतनी दूर हो जाना कि छोटा दिखाई पड़े । बहुत फासले पर हो जाना ।

२. आँख की पुतली । उ॰—देखि लोग सब भए सुखारे । एकटक लोचन चलत न तारे ।—मानस, १ । २४४ । मुहा॰—नयनों का तारा = दे॰ 'आँख का तारा' । मेरे नैनों का तारा है मेरा गोविंद प्यारा है ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

३. सितारा । भाग्य । किसमत । उ॰—ग्रीखम के भानु सो खुमान को प्रताप देखि तारे सम तारे भए मूँदि तुरकन के ।—भूषण (शब्द॰) ।

४. मोती । मुक्ता (को॰) ।

५. छह स्वरोंवाले एक राग का नाम (को॰) ।

तारा ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. तंत्र के अनुसार दस महाविद्याओं में से एक ।

२. बृहस्पति की स्त्री का नाम जिसे चंद्रमा ने उसके इच्छानुसार रख लिया था । विशेष—बृहस्पति ने जब अपनी स्त्री को चंद्रमा से माँगा, तब चंद्रमा ने देना अस्वीकार किया । इसपर बृहस्पति अत्यंत कुद्ध हुए और घोर युद्ध आरंभ हुआ । अंत में ब्रह्मा ने उपस्थित होकर युद्ध शांत किया और तारा को लेकर बृहस्पति को दे दिया । तारा को गर्भवती देख बृहस्पति ने गर्भस्थ शिशु पर अपना अधिकार प्रकट किया । तारा ने तुंरत शिशु का प्रसव किया । देवताओं ने तारा से पूछा—'ठीक ठीक बताओ,'यह किसका पुत्र है ?' तारा ने बड़ी देर के पीछे बताय—'यह दस्युहंतम नामक पुत्र चंद्रमा का है' । चंद्रमा ने अपने पुत्र को ग्रहण किया और उसका नाम बुध रखा ।

३. जैनों की एक शक्ति ।

४. बालि नामक बंदर की स्त्री और सुसेन की कन्या । विशेष—इसने बालि के मारे जाने पर उसके भाई सुग्रीव के साथ रामचंद्र के अदेशानुसार विवाह कर लिया था । तारा पंचकन्याओं में मानी जाती है और प्रातः काल उसका नाम लेने का बड़ा माहात्म्य समझा जाता है । यथा— अहल्या द्रौपदी तारा कुंती मंदोदरी तथा । पंच कन्या स्मरेन्नित्य महापातकनाशनम् । ।

५. सिर में बाँधने का चीरा ।

५. राजा हरिश्चंद्र की पत्नी का नाम । तारामती (को॰) ।

६. बौद्धों की एक देवी (को॰) ।

तारा पु ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'ताला' । उ॰—हिय भँडार नग आहि जो पूँजी । खोलि जीभ तारा कै कूँजी ।—जायसी ग्रं॰ (गुस), पृ॰ १३५ । मुहा॰—तारा मारना = ताला बंद करना । उ॰—ता पाछे वह ब्राह्मन ने अपने बेटा कों घर में मूंदि घर कौ तारयो मारयो ।—दो सौ बावन॰, भा॰ १, पृ॰ २७६ ।

तारा † ^४ संज्ञा पुं॰ [सं॰ ताल(= सर)] तालाब ।