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ताली

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ताली ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. लोहे की वह कील जिससे ताला खोला और बंद किया जाता है । कुंजी । चाबी । उ॰—तरक ताली खुलै ताला ।—घट॰, पृ॰ ३७० ।

२. ताड़ी । ताड़ का मद्य ।

३. तालमूली । मुसली ।

४. भूआँवला । भूम्यामलकी ।

५. अरहर ।

६. ताम्रवल्ली लता ।

७. एक प्रकार का छोटा ताड़ जो बंगांल और बरमा में होता हैं । बजरबट्टू । बट्टू । उ॰—तासली तृमद्रुम केतकी खर्जूरी यह आहि ।—अनेकार्थ॰, पृ॰ २२ ।

८. एक वर्णवृत्त ।

९. मेहराब के बीचेबीच का पत्थर या ईंट ।

१०. दोनों फैली हुई हथेलियों को एक दूसरी पर मारने की क्रिया । करतलों का परस्पर आघात । थपेड़ी । उ॰—रानी नीलदेवी सोमदेव राजपूतों के साथ आते हैं ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ५४६ । क्रि॰ प्र॰—पीटना ।—बजाना । मुहा॰—ताली पीटना या बजाना = हँसी उड़ाना । उपहास करना । ताली बज जाना = उपहास होना । निरादर होना । एक हाथ से ताली नहीं बजती = बैर या प्रीति एक ओर से नहीं होती । दोनों के करने से लड़ाई झगड़ा या प्रेम का व्यवहार होता है ।

११. दोनों हथेलियों को फैलाकर एक दूसरे पर मारने से उत्पन्न शब्द । करतलध्वनि ।

१२. नृत्य का एक भेद । विशेष—मृदंगी दंडिका ताली कहली श्रुत धर्धुरी । नृत्य गीत प्रबंध च अष्टांगो नृत्य उच्यते ।—पृ॰ रा॰, २५ । १२ ।

ताली ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ ताल (= जलाशय)] छोटा ताल । तलैया । गड़ही । उ॰—फरइ कि कोदव बालि सुसाली । मुकता प्रसव कि संबुक ताली ।—तुलसी (शब्द॰) ।

ताली ^३ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] पैर की बिचली उँगली का पोर या ऊपरी भाग ।

ताली ^४ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] समाधि तारी । उ॰—(क) भूले सुधि बुधि ज्ञान ध्यान सौं लागी ताली ।—ब्रज॰ ग्रं॰, पृ॰ १५ । (ख) जुग पानि नाभि ताली लगाय । रमि द्रिष्टि द्रिष्ट्रि गिरि बंध राय ।—पृ॰ रा॰, १ ।४८९ ।

ताली ^५ संज्ञा पुं॰ [सं॰ तालिन्] शिव [को॰] ।