तिथि

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तिथि संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. चंद्रमा की कला के घटने या बढ़ने के अनुसार गिने जानेवाले महीने का दिन । चांद्रमास के अलग अलग दिन जिनके नाम संख्या के अनुसार होते हैं । मिति । तारीख । यौ॰—तिथिपक्ष । तिथिवृद्धि । विशेष—पक्षों के अनुसार तिथियाँ भी दो प्रकार की होती हैं । कृष्ण और शुक्ल । प्रत्येक पक्ष में १५ तिथियाँ होती हैं । जिनके नाम ये हैं—प्रतिपदा (परिवा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी, षष्ठी (छठ), सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, (ग्यारस), द्वादशी (दुआस), त्रयोदश (तेरस), चतुर्दशी (चौदस), पूर्णिमा या अमावास्या । कृष्णपक्ष की अंतिम तिथि अमावास्या और शपक्लपक्ष की पूर्णिमा कहलाती है । इन तिथियों के पाँच वर्ग किए गए हैं—प्रतिपदा, षष्ठी और एकदशी का नाम जया, द्वितीया, सप्तमी और द्वादशी का नमा भद्रा, तृतीया अष्टमी और त्रयोदशी का नाम जया, चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी का नाम रिक्ता; और पंचमी, दशमी और पूर्णिमा या अमावस्या का नाम पूर्णा है । तिथियों का मान नियत होता है अर्थात् सब तिथियाँ बराबर दंडों की नहीं होती ।

२. पंद्रह की संख्या ।