तेज

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तेज ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ तेजस्] दीप्ति । कांति । चमक । दमक । आभा । उ॰—जिमि बिनु तेज न रूप गोसाई ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. पराक्रम । जोर । बल ।

३. वीर्य । उ॰— पतित तेज जो भयो हमारो कहो देव को धारी ।—रघुराज (शब्द॰) ।

४. किसी वस्तु का सार भाग । तत्व ।

५. ताप । गर्मी ।

५. पित्त ।

७. सोना ।

८. तेजी । प्रचंडता । उ॰— (क) तेज कृशानु शेष महि शेषा । अथ अवगुन धन धनी धनेसा ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) थल सो अचल शील, अनिल से चलचित्त, जल सो अमल तेज कैसो गायो है । — केशव (शब्द॰) ।

९. प्रताप । रोब दाब । १० । मक्खन । नैनू ।

११. सत्वगुण से उत्पन्न लिंगशरीर ।

१२. मज्जा ।

१३. पाँच महाभूतों में से तीसरा भूत जिसमें ताप और प्रकाश होता है । अग्नि । विशेष—सांख्य में इसका गुण शब्द, स्पर्श और रूप माना गया है । न्याय या वैशोषिक के अनुसार यह दो प्रकार का होता है—नित्य और अनित्य । परमाणु रूप में यह नित्य और कर्म रूप में अनित्य होता है । शरीर, इंद्रिय और विषय के भेद से अनित्य तेज तीन प्रकार का होता हैं । शरीर तेज वह तेज है जो सारे शरीर में व्याप्त हो । जैसा, आदित्यलोक में । इंद्रिय तेज वह है जिससे रूप आदि का ग्रहण हो । जैसा, नेत्र में । विषय तेज चार प्रकार का है—भौम, दिव्य, औदर्य और आकरज । भौम वह है जो लकडी़ आदि जलाने से हो; दिव्य वह है जो किसी दैवी शक्ति अथवा आकाश में दिखाई दे; जैसे, बिजली; औदर्य वह है जो उदर में रहता है और जिससे भोजन आदि पचता है; और आकरज वह है जो खनिज पदार्थों में रहता है, जैसा सोने में । शरीर में तेज रहने से साहस और बल होता है, खाद्य पदार्थ पचते हैं और शरीर सुंदर बना रहता ।

१४. घोडे़ का वेग या चलने की तेजी । विशेष—यह तेज दो प्रकार का है—सततोत्थित और भयोत्थित । सततोत्थित तो स्वाभाविक है और भयोत्थित वह है जो चाबुक आदि मारने से उत्पन्न होता है । १५तीक्ष्णता (को॰) ।

१६. तीक्ष्ण धार (को॰) ।

१७. दिव्य ज्योति (को॰) ।

१८. उग्रता (को॰) ।

१९. अधीरता (को॰) ।

२०. प्रभाव (को॰) ।

२१. प्राणभय की भी स्थिति में अपमान आदि न सहने की प्रकृति (को॰) ।

२२. उष्ण प्रकाश (को॰) ।

२३. भेजा (को॰) ।

२४. दूसरों को अभिभूत करने की शक्ति (को॰) ।

२५. सत्वगुण से उत्पन्न लिंग शरीर (को॰) ।

२६. रजोगुण (को॰) ।

२७. तेजोमय व्यक्ति (को॰) ।

२८. आँख की स्वच्छता (को॰) ।

तेज ^२ वि॰ [फा़॰ तेज]

१. तीक्ष्ण धार का । जिसकी धार पैनी हो । उ॰—यह चाकू बडा़ तेज है ।

२. चलने में शीघ्रगामी । उ॰—यदपि तेज रौहाल वर लगी न पल को वार । तउ ग्वैंडो़ घर को भयो पैंडो़ कोस हजार ।—बिहारी (शब्द॰) ।

३. चटपट काम करनेवाला । फुरतीला । जैसे,—यह नौकर बडा़ तेज है ।

४. तीक्ष्ण । तीखा । झालदार । जैसे, तेज सिरका ।

५. महँगा । गराँ । बहुमूल्य । उ॰—आजकल कपडा़ बहुत तेज है ।

६. उग्र । प्रचंड । क्रि॰ प्र॰—पडना ।

७. चटपट अधिक प्रभाव करनेवाला । जिसमें भारी असर हो । जैसे, तेज जहर ।

८. जिसकी बुद्धि बहुत तीक्ष्ण हो । जैसे, यह लड़का बहुत तेज है ।

९. बहुत अधिक चंचल या चपल ।

१०. उग्र । प्रचंड । जैसे, तेज मिजाज ।

तेज पु ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'ताजी'—१' । उ॰—काबिल्ली उर तेज रोम रोमी पंजाबी ।—पृ॰ रा॰, ११ ।५ ।