त्याग

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त्याग का अर्थ होता है तज देना।

उदाहरण

  • मान, अपमान, अहंकार तथा मोह को त्याग देना चाहिये।
  • काकभुशुण्डि जी ने अपने पूर्व जन्मों में बिना किसी कष्ट के अपना शरीर त्याग दिया।
  • भारत की स्वतन्त्रता के लिये क्रान्तिकारी वीरों के द्वारा किये गये त्याग और बलिदान की गाथायें सुन कर रोमांच हो आता है।

मूल

  • त्याग संस्कृत मूल का शब्द है।

अन्य अर्थ

  • तजना
  • छोड़ देना

संबंधित शब्द

हिंदी में

अन्य भारतीय भाषाओं में निकटतम शब्द

हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

त्याग संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. किसी पदार्थ पर से अपना स्वत्व हटा लेने अथवा उसे अपने पास से अलग करने की क्रिया । उत्सर्ग । क्रि॰ प्र॰—करना । यौ॰—त्यागपत्र ।

२. किसी बात को छोड़ने की क्रिया । जैसे असत्य का त्याग ।

३. संबंध या लगाव न रखने की क्रिया ।

४. विरक्ति आदि के कारण सांसारिक विषयों और पदार्थों आदि को छोड़ने की क्रिया । विशेष—हिंदुओं के धर्मग्रंथों में इस प्रकार के त्याग का बहुत कुछ माहात्म्य बतलाया गया है । त्याग करनेवाला मनुष्य निष्काम होकर परोपकार के तथा अन्यान्य शुभ कर्म करता रहता है और विषय वासना या सुखोपभोग आदि से किसी प्रकार का संबंध नहीं रहता । ऐसा मनुष्य मुक्ति का अधिकारी समझा जाता है । गीता में त्याग को संन्यास की ही एक विशेष अवस्था माना है । उसके अनुसार काम्य धर्म का परित्याग तो संन्यास है और कर्मों के फल की आशा न रखना त्याग है । मनु के अनुसार संसार की और सब चीजें तो त्याज्य हो सकती हैं, पर माता, पिता, स्त्री और पुत्र त्याज्य नहीं हैं ।

५. दान ।

६. कन्यादान (डिं॰) ।