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त्री

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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त्री पु ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'त्रिया' । उ॰—गुण गजबंध तणा कब गावै । दुंरस परायण स्त्री दरसावै ।—रा॰ रू॰, पृ॰ १६ ।

त्री पु ^२ वि॰ [हिं॰] दे॰ 'त्रि' । उ॰—त्री अस्थान निरंतरि निरधार । तहँ प्रभु बैठे सभ्रथ सार ।—दादू॰, पृ॰ ६७५ ।