थैरज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]थैरज पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्थैर्य] कठोरता । स्थिरता । दृढ़ता । उ॰— ए हरि तोहर थैरज जत से सब कहत धनि गेलि गेलि सून सँकेता रे ।—विद्यापति, पृ॰ २६० ।
थैरज पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्थैर्य] कठोरता । स्थिरता । दृढ़ता । उ॰— ए हरि तोहर थैरज जत से सब कहत धनि गेलि गेलि सून सँकेता रे ।—विद्यापति, पृ॰ २६० ।