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दर्द

विक्षनरी से

शारीरिक तकलीफ,

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

दर्द संज्ञा पुं॰ [फा़॰]

१. पीड़ा । व्यथा । क्रि॰ प्र॰ —होना । मुहा॰—दर्द उठना = दर्द उत्पन्न होना । (किसी अंग का) दर्द करना = (किसी अंग का) पीड़त या व्यथित होना । दर्द खाना = कष्ट सहना । पीड़ा सहना । जैसे,— उसने दर्द खाकर नहीं जाना? दर्द लगाना = पीड़ा आरंभ होना ।

२. दुःख । तकलीफ । जैसे, दूसरे का दर्द समझना । मुहा॰—दर्द आना = तकलाक मालूम होना । जैसे,— रुपया निकालते दर्द आता है ।

३. सहानुभूति । करुणा । दया । तर्स । रहम । क्रि॰ प्र॰—आना ।—लगना । महा॰ —दर्द खाना = तरस खाना । दया करना ।

४. हानि का दुःख । खो जाने या हाथ से निकल जोने का कष्ट । जैसे,— उसे पैसे का दर्द नहीं । यौ॰— दर्दनाक । दर्दमंद । दर्देजिगर = दर्ददिल । दर्ददिल । मन— स्ताप । मनोव्यथा । दर्देसर = (१) शिर पीड़ा । (२) झझट का काम । दर्दगम = पीड़ा आर दुःख । कष्टसमूह । उ॰— मुझको शायर न कहो मीर कि साहब मैंने । दर्दोगम कितने किए जमा तो दीवान किया ।— कविता कौ॰, भा॰ ४, पृ॰ १२२ ।