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दल

विक्षनरी से
दल

संज्ञा

समूह, एक से अधिक लोगों का साथ में कोई कार्य हेतु होना।

अन्य शब्द

  1. राहत दल
  2. राजनीतिक दल

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

दल संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. किसी वस्तु के उन दो सम खंडों में से एक, जो एक दूसरे से स्वभावतः जुड़े हुए हों पर जरा सा दबाब पड़ने से अलग हो जायँ । जैसे चने, अरहर मूँग, उरद, मसूर, चिएँ इत्यादि के दो दल जो चक्की में दलने से अलग हो जाते हैं ।

२. पौधों का पत्ता । पत्र । जैसे, तुलसीदल ।

३. तमाल- पत्र ।

४. फूल की पंखड़ी । उ॰—जय जय अमल कमलदल लोचन ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

५. समूह । झुंड । गरोह ।

६. गुट । चक्र । जैसे,—वह दूसरे के दल में है ।

७. सेना । फौज जैसे, शत्रुदल ।

८. मयूरपुच्छ । उ॰—दल कहिए नृप को कटक, दल पत्रन को नाम, दल बरही के चंद सिर धरे स्याम अभिराम ।—अनेकार्थ॰, पृ॰ १३५ ।

९. पटरी के आकार की किसी वस्तु की मोटाई । परत की तरह फैली हुई किसी चीज की मोटाई ।

९. अस्त्र के ऊपर का आच्छादन । कोष । म्यान ।

१०. धन ।

११. जल में होनेवाला एक तृण ।

११. अंश । टुकड़ा । खंड (को॰) ।

१२. किसी का आधा अंश । अर्धांश (को॰) ।

१३. वृक्षविशेष (को॰) ।

१४. इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित राजा के एक पुत्र जिनकी माता मंडूकराज की कन्या थी (को॰) ।