दारी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

दारी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक क्षुद्र रोग, जिसमें पैर के तलवे का चमड़ा कड़ा हो जाता है और चिड़ चिड़ाकर जगह जगह फट जाता है । बेवाई । खरुवा । विशेष— भावप्रकाश में लिखा है कि जो लोग पैदल अधिक चलते हैं उनकी वायु कुपित होकर सूखी हो जाती है, जिससे चमड़ा कड़ा होकर फट जाता है ।

दारी ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ दारिन्] वह पति जिसे कई पत्नियाँ हों । पति (को॰) ।

दारी ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ दारिका] दासी । लौंडी । वह लौंडी जिसे लड़ाई में जीतकर लाया गया हो । कुलटा । यौ॰—दारीजार ।