द्रुह्यु

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

द्रुह्यु संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. प्राचीन आर्यों का एक वंश या जनसमूह । उ॰— राजवंशों की तालिका देते हुए पार्जिटर ने यादव, हैहय द्रुह्य, तथा दक्षिणी पंचाल को गिनाया है । —प्रा॰ भा॰, प॰, पृ॰ २१ ।

२. शर्मिष्ठा के गर्भ से उत्पन्न ययाति राजा का ज्येष्ठ पुत्र, जिसने ययाति का बुढ़ापा लेना अस्वीकार किया था । विशेष— ययाति से इसने कहा था— जराग्रस्त मनुष्य, स्त्री, रथ, हाथी इत्यादि को नहीं भोग सकता । ययाति ने इसपर इसे शाप दिया कि तेरी कोई अभिलाषा पूरी नहीं होगी । जहाँ रथ, पालकी, हाथी, घोडे़ आदि की सवारी ही नहीं होती, जहाँ कूद फाँदकर चलना पड़ता है, जहाँ 'राजा' शब्द का व्यवहार ही नहीं है वहाँ तुझे रहना पडे़गा । द्रुह्य के वंश में कोई राजा नहीं हुआ (महाभारत) । पर आसाम के पास स्थित त्रिपुरा के राजवंश की जो वंशावली 'राजमाला' नाम की है उसमें त्रिपुरा राजवंश का चंद्रवंशी एक राजा द्रुह्यु से चलना लिखा गाया है । पर विष्णुपुराण और हरिवंश के अनुसार द्रुह्य को वभु और सेतु नामक दो पुत्र हुए । सेतु के पौत्र का नाम गांधार था जिसके नाम से देश का नाम पड़ा । अस्तु, पुराणों के अनुसार द्रुह्यु भारत के पश्चिमी कोने पर गया था न कि पूर्वी । राजमाला की कथा कल्पित है ।