धक्का

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

धक्का संज्ञा पुं॰ [सं॰ धम, हिं॰ घमक, घोंक या सं॰ धक्क (= नष्ट करना)]

१. एक वस्तु का दूसरी वस्तु के साथ ऐसा वेगयुक्त स्पर्श जिससे एक या दोनों पर एकबारगी भारी दबाव पड़ जाय अथवा गति के वेग का वह भारी दबाव जो एक वस्तु के साथ दूसरी वस्तु के एकबारगी जा लगने से एक या दोनों पर पड़ता है । आघात या प्रतिघात । टक्कर । रेला । झोंका । जैसे,—(क) सिर में दीवार का धक्का लगना । (ख) चलती गाड़ी के धक्के से गिर पड़ना । क्रि॰ प्र॰—देना ।—पहुँचना ।—पहुँचाना ।—मारना ।—लगना ।—लगाना ।—सहना । यौ॰—धक्कापेल । धक्कमधक्का । विशेष—केवल गुरुत्व के कारण जो दबाब पड़ता है उसे 'धक्का' नहीं कह सकते, गति के वेग के अवरोध से जो दबाव एक- बारगी पड़ जाता है उसी को धक्का कहते हैं ।

२. किसी व्यक्ति या वस्तु को उसकी जगह से हटाने, खिसकाने गिराने आदि के लिये वेग से पहुँचाया हुआ दबाव अथवा इस प्रकार का दवाव पहुँचाने का काम । ढकेलने की क्रिया । झोंका । चपेट । जैसे,—इसे धक्का देकर निकाल दो । क्रि॰ प्र॰—करना ।—देना ।—मारना ।—लगाना ।—सहना ।—होना । मुहा॰—धक्का खाना = धक्का सहना । उपेक्षित होना । धक्के देकर निकालना = तिरस्कार और अपमान के साथ सामने से हठाना ।

३. ऐसी भारी भीड़ जिसमें लागों के शरीर एक दूसरे से रगड़ खाते हों । कशमकश । कसामस । जैसे,—मंदिर के भीतर बड़ा धक्का है, मत जाओ ।

४. शोक या दुःख का आघात । दुःख की चोट । संताप । जैसे,—भाई के मर जाने से उसे बड़ा धक्का पहुँचा । क्रि॰ प्र॰—पहुँचना ।—पहुँचाना ।

५. आपदा । विपत्ति । आफत । दुर्घटना ।

६. हानि । टोटा । घाटा । नुकसान । जैसे,—इस व्यापार में उसे लाखों का धक्का बैठा । क्रि॰ प्र॰—खाना ।—बैठना ।

७. कुश्ती का एक पेंच जिसमें बायाँ पैर आगे रखकर विपक्षी की छाती पर दोनों हाथों से गहरा धक्का या चपेट देकर उसे गिराते हैं । छाप । ठोढ़ ।