धत्ता

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

धत्ता ^१ संज्ञा पुं॰ [देश॰] एक छंद जिसके विषम (पहले और तीसरे) चरणों में १८ और सम (दूसरे, चौथे) चरणों में १६ मात्राएँ हौती हैं । अंत में तीन लघु होते हैं । यह छंद द्विपदी धत्ता कहलाता है और दो ही पंक्तियों में लिखा जाता है । जैसे,—श्रीकृष्णमुरारी कुंजविहारी कर, भजु जन मन- रंजन पदन । घ्यावो बनवारी जनदुखहारी, जिहि नित जप गंजन मदन ।

धत्ता ^२ संज्ञा पुं॰ [देश॰] थाली की बारी का ढालुवाँ भाग ।

धत्ता पु वि॰ [हिं॰] दे॰ 'धता' । उ॰—धन घाइ सघत्ता सूर सरता । मैंगल मत्ता करि धत्ता ।—पृ॰ रा॰, २५ । ५४ ।