धनुर्यज्ञ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

धनुर्यज्ञ संज्ञा पुं॰ [सं॰] धनुस् संबंधी उत्सव । एक यज्ञ जिसमें धनुस् का पूजन तथा उसके चलाने आदि की परीक्षा भी होती थी । विशेष—मिथिला के राजा जनक ने अपनी कन्या सीता के विवाहार्थ वर चुनने कै लिये इस प्रकार का यज्ञ किया था । कंस ने भी छलपूर्वक कुष्ण कौ बुलाने के लिये इस प्रकार के यज्ञ का अनुष्ठान किया था ।