धूम

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

धूम ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. धुआँ । धूआँ । पर्या॰—मरुद्धाह । खतमाल । शिखिध्वज । अग्निवाह । तरी ।

२. अजीर्ण या अपच में उठनेवलाली डकार ।

३. विशेष प्रकार का धुआँ जिसका कई रोगों में सेवन कराया जाता है । विशेष—सुश्रुत ने पाँच प्रकार के धूम कहे हैं—प्रायोगिक (जो मसाले से लपेटी हुई सींक जलाने से हो); स्नेहन (जो बत्ती में मसाला लपेटकर घी या तेल में जलाने से हो), वैरेचन (जो पिप्पली, विडंग, अपामार्ग इत्यादि नस्य द्रब्यों की बत्ती से हो), कासघ्न (जो काकड़ासिंगी, कंटकारी, बृहती आदि कासघ्न औषधों की बत्ती से हो), और वामनीय (जो स्नायु, चमड़े, सींग, सूखी मछली या कृमि आदि को जलाने से हो) ।

४. धूमकेतु ।

५. उल्कापात ।

६. एक ऋषि का नाम ।

धूम ^३ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] एक घास जो तालों में होती है ।