नारंगी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

नारंगी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [दे॰ नारङ्ग, अ॰ नारंज]

१. नीबू की जात ि का एक मझोला पेड़ जिसमें मीठे सुगंधित और रसीले फल लगते हैं । विशेष—पेड़ इसका नीबू ही का सा होता है । नारंगी का छिलका मुलायम और पीलापन लिए हुए लाल रंग का होता है और गूदे से अधिक लगा न रहने के कारण बहुत सहज में अलग हो जाता है । भीतर पतली झिल्ली से भढ़ी हुई फाँकें होती हैं जिसनें रस से भरे हुए गूदे के रवे होते हैं । एक एक फाँक के भीतर दो या तीन बीज होते हैं । नारंगी गरम देशों में होती है । एशिया के अतिरिक्त युरोप के दक्षिण भाग, अफ्रिका के उत्तर भाग और अमेरिका के कई भागों में इसके पेड़ बीगीचों में लगाए जाते हैं और फल चारों ओर भेजे जाते हैं । भारत में जो मीठी नारंगियाँ होती हैं दे और कई फलों के समान अधिकतर आसाम होकर चीन से आई हैं, ऐसा लोगों का मत है । भारतवर्ष में नारंगियों के लिये प्रसिद्ध स्थान हैं सिलहट, नागपुर, सिकिम, नैपाल, गढ़वाल, कुमायूँ, दिल्ली, पूना और कुर्ग । नारंगी के प्रधान चार भेद कहे जाते हैं—संतरा, कँवला, माल्टा और चीनी । इनमें संतरा सबसे उत्तम जाति है । संतरे भी देशभेद से कई प्रकार के होते हैं । चीन और भारतवर्ष के प्राचीन ग्रंथों में नारंगी का उल्लेख मिलता है । संस्कृत में इसे नागंरंग कहते हैं । 'नाग' का अर्थ है सिंदूर । छिलके के लाल रंग के कारण यह नाम दिया गया । सुश्रुत में नागरंग का नाम आया है । इसमें कोई संदेह न हीं कि युरोप में यह फल अरबवालों के द्वारा गया ।

२. नारंगी के छिलके का सा रंग । पीलापन लिए हुए लाल रंग ।

नारंगी ^२ वि॰ पीलापन लिए हुए लाल रंग का ।