निघण्टु

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

निघंटु संज्ञा पुं॰ [सं॰ निघण्टु]

१. वैदिक शब्दों का संग्रह । वैदिक कोश । विशेष— यास्क ने निघंटु की जो व्याख्या लिखी है वह निरुक्त के नाम से प्रसिद्ध है । यह निघंटु अत्यंत प्राचीन है क्योंकि यास्क के पहले भी शाकुपूर्णि और स्थौलष्ठीवी नामक इसके दो व्याख्याकार या निरुक्तकार हो चुके थे । महाभारत में कश्यप को निघंटु का कर्ता लिखा है ।

२. शब्दसंग्रह मात्र । जैसे, वैद्यक का निघंटु ।