नींद

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

नींद संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ निद्रा + प्रा॰ निद्दा] जीवन की एक नित्यप्रति होनेवाली अवस्था जिसमें चेतन क्रियाएँ रुकी रहती हैं और शरीर और अंतःकरण दोनों विश्राम करते हैं । निद्रा । स्वप्न । सोने की अवस्था । वि॰ दे॰ 'निद्रा' । उ॰—(क) कीन्हेसि भूँख नींद बिसरामा ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) जो करि कष्ट जाइ पुनि कोई । जातहि नींद जुड़ाई होई ।—तुलसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—आना ।—छूटना ।—जाना ।—लगना । मुहा॰—नींद उचटना = नींद का दूर होना । नींद उचाटना = नींद दूर करना । सोने मे बाधा डालना । नींद का दुखिया = बहुत सोनेवाला । सदा सोने का इच्छुक रहनेवाला । नींद का माता = नींद से व्याकुल । नींद से गिर गिर पड़नेवाला । नींद उचाट होना = नींद का खुलने पर फिर न आना । सोने में बाधा पड़ना । नींद टूटना = नींद का छूट जाना । जग पड़ना । नींद खराब करना = सोने का हर्ज करना । निद्रा की दशा न रहना । नींद पड़ना = नींद आना । निद्रा की अवस्था होना । नींद परना पु = नींद आना । उ॰—नींद न परै रैन जो आई ।—जायसी (शब्द॰) । नींद भरना = नींद पूरी करना । सोना । नींद भर सोना = जितनी इच्छा हो उतना सोना । इच्छा भर सोना । उ॰—डासत हो सब बीति निसा गई कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो ।—तुलसी (शब्द॰) । नींद मारना = सोना । नींद लेना = सोना । उ॰—(क) नींद न लीन्ह रैन सब जागा । होत बिहान आय गढ़ लागा ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) जब ते प्रीत स्याम सों कीन्हा । ता दिन ते नैननि नेकहु नींद न लीन्हा ।—सूर (शब्द॰) । नींद संचरना = नींद आना । उ॰— द्वादशि में जो पारण करहीं । और शयन जो नींद संचरहीं ।—सबलसिंह (शब्द॰) । नींद हराम करना = सोना छुड़ा । देना । सोने न देना । नींद हराम होना = सोना छूट जाना । सोने की नौबत न आना ।