पँवारना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पँवारना † क्रि॰ स॰ [सं॰ प्रवारण (=रोकना)] हटाना । दूर करना । फेंकना । उ॰—(क) सावज न होई भाई सावज न होइ । बाकी मांसु भखै सब कोइ । सावज एक सकल संसारा अवि- गति वाकी बाता । पेट फारि जो देखिए रे भाई आहि करेज न आँता । ऐसी वाकी मांस रे भाई पल पल मांसु बिकाई । हाड़ गोड़ लै धुर पँवारै आगि धुवाँ नहिं खाई ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) सुआ सुनाक कठोर पँवारी । वह कोमल तिल कुसुम सँवारी ।—जायसी (शब्द॰) । दे॰ 'पवारना' ।