पंचरत्न
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संज्ञा
[सम्पादित करें]पंचरत्न
- पाँच प्रमुख रत्न; विशेष रूप से किसी राजा के दरबार के पाँच उत्कृष्ट विद्वान या गुणवान व्यक्ति।
- श्रेष्ठता की दृष्टि से चुनी गई पाँच अनमोल वस्तुएँ या व्यक्ति।
उच्चारण
[सम्पादित करें](Delhi) आईपीए(कुंजी): /pən.t͡ʃɾət̪.nᵊ/, [pə̃n̪.t͡ʃɾət̪̚.n̪ᵊ]
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पंचरत्न संजा पुं॰ [सं॰ पञ्चरत्न] पाँच प्रकार के रत्न । विशेष—कुछ लोग सोना, हीरा, नीलम, लाल और मोती को पंचरत्न मानते हैं ओर कुछ लोग मोती, मूँगा, वैक्रांत, हीरा और पन्ना को ।
२. महाभारत के पाँच प्रसिद्ध आख्यान— गीता, विष्णुसस्त्रनाम, भीष्मस्तवराज, अनुस्मृति ओर गजेंद्र- मोक्ष (को॰) ।