पक्ष

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पक्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. किसी स्थान वा पदार्थ के वे दोनों छोर या किनारे जो अगले और पिछले से भिन्न हों । किसी विशेष स्थिति से दहिने और बाएँ पड़नेवाले भाग । और । पार्श्व । तरफ । जैसे, सेना के दोनों पक्ष । विशेष—'ओर', 'तरफ' आदि से 'पक्ष' शब्द में यह विशेषता है कि यह वस्तु के ही दो अंगों को सूचित करता है, वस्तु से पृथक् दिक् मात्र को नहीं ।

२. किसी विषय के दो या अधिक परस्पर भिन्न अंगों में से एक । किसी प्रसंग के संबंध में विचार करने की अलग अलग बातों में से कोई एक । पहलू । जैसे,—(क) सब पक्षों पर विचार कर काम करना चाहीए । (ख) उत्तम पक्ष तो यही है कि तुम खुद जाओ ।

३. किसी विषय पर दो या अधिक परस्पर भिन्न मतों में से एक । वह बात जिसे कोई सिद्ध करना चाहता हो और किसी दूसरे की बात के विरुद्ध हो । जैसे,—(क) तुम्हारा पक्ष क्या है ? (ख) तुम शास्त्रार्थ में एक पक्ष पर स्थिर नहीं रहते । यौ॰—उत्तम पक्ष । पूर्बपक्ष । पक्षखंडन । पक्षग्रहण । पक्षमंडन । पक्षसमर्थन । मुहा॰—पक्ष गिरना = मत का युक्तियों द्वारा सिद्ध न हो सकना । शास्त्रार्थ या विवाद में हार होना । पक्ष निर्बल पड़ना = मत का युक्तियों द्वारा पुष्ट न हो सकना । पक्ष प्रबल पड़ना = मत का युक्तियों द्वारा पुष्ट होना । दलील मजबूत होना । पक्ष सँभालना = किसी मत या बात का खंडन होने से बचाना । पक्ष में = मत या बात के प्रमाण में । कोई बात सिद्ध करने के लिये ।

४. दो या अधिक बातों में से किसी एक के संबंध में (किसी की) ऐसी स्थिति जिससे उसके होने की इच्छा, प्रयत्न आदि सूचित हो । अनुकूल मत या प्रवृत्ति । जैसे,—तुम देने के पक्ष में हो कि न देने के ? मुहा॰—किसी बात के पक्ष में होना = किसी बात का होना ठीक या अच्छा समझना ।

५. ऐसी स्थिति जिससे एक दूसरे के विरुद्ध प्रयत्न करनेवालों में से किसी एक की कार्यसिद्धि की इच्छा या प्रयत्न सूचित हो । झगड़ा या विवाद करनेवालों में से किसी के अनुकूल स्थिति । जैसे,—इस मामले में वह हमारे पक्ष में है । मुहा॰—(किसी का) पक्ष करना = दे॰ 'पक्षपात करना' । पक्ष ग्रहण करना = पक्ष लेना । (किसी का) पक्ष लेना = (१) (झगड़े में) किसी की ओर होना । किसी की सहायता में खड़ा होना । सहायक होना । (२) पक्षपात करना । तरफदारी करना ।

६. निमित्त । लगाव । संबंध । जैसे,—ऐसा करना तुम्हारे पक्ष में अच्छा न होगा ।

७. वह वस्तु जिसमें साध्य की प्रतिज्ञा करने हैं । जैसे, 'पर्वत वह्निमान है' । यहाँ पर्वत पक्ष है जिसमें साध्य वह्निमान की प्रतिज्ञा की गई है (न्याय) ।

८. किसी की ओर से लड़नेवालों का दल सा समूह । फौज । सेना । बल ।

९. सहायकों या सवर्गों का दल । साथ रहनेवाला समूह । उ॰—अंग पक्ष जाने बिना करिय न बैर बिरोध ।—(शब्द॰) । यौ॰—केशपक्ष = बालों का समूह ।

१०. सहायक । सखा । साथी ।

११. किसी विषय पर भिन्न भिन्न मत रखनेवालों के अलग अलग दल । विवाद या झगड़ा करनेवालों की अलग अलग मंडलियाँ । वादियों प्रतिवादियों के अलग अलग समूह । जैसे,—(क) दोनों पक्षों को साव- धान कर दो कि झगड़ा न करें । (ख) तुम कङी इस पक्ष में मिलते हो कभी उस पक्ष में ।

१२. चिड़ियों का डैना । पंख । पर ।

१३. शरपक्ष । तीर में लगा हुआ हुआ पर ।

१४. एक महीने के दो भागों में से कोई एक । चांद्रमास के पंद्रह पंद्रह दिनों के दो विभाग । पंद्रह दिन का समय । पाख । विशेष—पर्व दो होते हैं—कृष्ण और शुक्ल । कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक कृष्ण पक्ष कहलाता है क्योंकि उसमें चंद्रमा की कला प्रतिदिन घटती जाती हैं, जिसमें रात अँधेरी होती है । शुक्ल प्रतिप्रदा से लेकर पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष कहलाता है क्योंकि उसमें चंद्रमा की कला प्रतिदिन बढ़ती जाती है जिससे रात उजेली होती है । कृष्ण पक्ष में सूर्यास्त से और शुक्ल पक्ष में सूर्योदय से तिथि ली जाती है ।

१५. गृह । घर ।

१६. चूल्हे का छेद ।

१७. हाथ में पहनने का कड़ा ।

२०. महाकाल । शिव ।

२१. नीव । भित्ती । दीवार (को॰) ।

२२. पड़ोस (को॰) ।

२३. दीवार का ताख । पाख (को॰) ।

२४. शुद्धता । पूर्णता (को॰) ।

२५. स्थिति । दशा (को॰) ।

२६. शरीर (को॰) ।

२७. सूर्य (को॰) ।

२८. दो की संख्या का सूचक शब्द (को॰) ।