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पचाना

विक्षनरी से

पचाना

  1. खाए हुए भोजन को पाचन क्रिया द्वारा शरीर में समाहित करना।
  2. कोई बात, तर्क, अपमान या अनुभव को मानसिक रूप से स्वीकार या सहन करना।

(Delhi) आईपीए(कुंजी): /pə.t͡ʃɑː.nɑː/, [pə.t͡ʃäː.n̪äː]

उदाहरण वाक्य

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  • मसालेदार खाना हर किसी के पेट में नहीं पचता।
  • उसका अपमान वह कभी नहीं पचा सका।
  • उसने सच्चाई पचा ली और कुछ नहीं कहा।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पचाना क्रि॰ स॰ [हिं॰ पचना]

१. पचना का सकर्मक रूप । पकाना । आँच पर गलाना ।

२. खाई हुई वस्तु को जठराग्नि की सहायता से रसादि में परिणत कर शरीर में लगने योग्य बनाना । जीर्ण करना । हजम करना जैसे,—तुम चार चपातियाँ भी नहीं पचा सकते । संयो क्रि॰—जाना ।—डालना ।—लेना ।

३. समाप्त याँ नष्ट करना । जैसे, बाई पचाना, मोटाई पचाना आदि । क्रि॰ प्र॰—डालना ।—देना ।

३. किसी की कोई वस्तु अनुचित या अवैध उपाय से हस्तगत कर सदा अपने अधिकार में रखना । पराए माल को अपना कर लेना । हजम कर जाना । उगलने का उलटा । जैसे,—किसी का माल चुराना सहज है पर पचाना सहज नहीं है । संयो॰ क्रि॰—जाना ।—डालना ।—लेना ।

४. अवैध उपाय से हस्तगत वस्तु को अपने काम में लाकर लाभ उठाना । जैसे,—ब्राह्मण का धन है, ले तो लिया पर तुम पचा न सकोगे ।

५. अत्यधिक परिश्रम लेकर या क्लेश देकर शरीर मस्तिष्क आदि को गलाना, सुखाना या श्रय करना । जैसे—(क) तपस्या करके देह पचा डाली । (ख) बेवकूफ से बहस करके कौन व्यर्थ माथा पचावे ? संयो॰ क्रि॰—डालना ।—देना ।

६. एक पदार्थ का दूसरे पदार्थ को अपने आपमें पूर्ण रूप से लीन कर लेना । खपाना । जैसे,—यह चावल बहुत घी पचाता है ।