पड़ाव

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पड़ाव संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पड़ना + आव (प्रत्य॰)] सेना अथवा किसी यात्रीदल के यात्रा के बीच में प्रायः रात बिताने के लिये कहीं ठहरने का भाव । यात्रीसमूह का यात्रा के बीच में अवस्थान । जैसे,—आज यहीं पड़ाव पड़ेगा । क्रि॰ प्र॰—डालना ।—पड़ना ।

२. वह स्थान जहाँ यात्री ठहरते हों । वह स्थान जो यात्रियों को ठहरने के लिये निर्दिष्ट हो । चट्टी । टिकान । जैसे,—आज हम लोग अमुक पड़ाव पर विश्राम करेंगे । मुहा॰—पड़ाव मारना = (१) पड़ाव डाले हुए किसी यात्रीदल को लूटना । कारवान या काफिला लूटना । (२) कोई बड़ा साहसपूर्ण कार्य करना । भारी शौर्य प्रकट करना । जैसे,— कौन सा पड़ाव मार आए हो ?

३. चिपटे तले की बड़ी और खुली नाव जो जहाज से बोझ उता- रने और चढ़ाने के काम में आती है ।