पतवार

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पतवार संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पत्रवाल, पात्रपाल, प्रा॰ पात्तपड] नाव का एक विशेष और मुख्य अंग जो पीछे की ओर होता है । इसी के द्वारा नाव मोड़ी या घुमाई जाती है । कन्हर । कर्ण पतवाल । सुकान । विशेष—यह लकड़ी का और त्रिकोणाकार होता है । प्रायः आधा भाग इसका जल के नीचे रहता है और आधा जल के ऊपर । जो भाग जल के ऊपर रहता है उसमें एक चिपटा डंडा जड़ा रहता है जिसपर एक मल्लाह बैठा रहता है । पतवार को घुमाने के लिये यह डंडा मुठियों का काम देता है । यह डंडा जिस और घुमाया जाता है उसके विपरीत और नाव घूम जाती है ।