पताल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पताल संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाताल] दे॰ 'पाताल' । उ॰—ल्यावै आसमान तैं पताल तैं पकरि, पारावार तैं कढ़ावै थाह लेत न थकन है ।—हम्मीर॰, पृ॰ ११ ।

पताल आँवला संज्ञा पुं॰ [सं॰ पातालआमलकी अथवा भूम्यामल- की] औषध के काम में आनेवाला एक पौधा (क्षुप) । विशेष—यह बहुत बड़ा नहीं होता । पत्ते के नीते पतली डंडी निकलती है । इसी में फल लगते हैं । वैद्यक के अनुसार यह कडुवा, कषैला, मधुर, शीतल, वातकारक, प्यास, खाँसी, रक्तपित्त, कफ, पांडुरोग, क्षत विष का नाशक तथा पुत्र- प्रदायक है । पर्य्या॰—भूम्यामलकी । शिवा । ताली । क्षेत्रामली । तामलकी । सूक्ष्मफला । अफला । अमला । बहुपुत्रिका । बहुवीर्या । भूधात्री, आदी ।