पति

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पति ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] [स्त्री॰ पत्नी]

१. किसी वस्तु का मालिक । स्वामी । आधिपति । प्रभु । जैसे, भूमिपति, गृहपति आदि ।

२. स्त्री विशेष का विवाहित पुरुष । किसी स्त्री के संबंध में वह पुरुष जिसका उस स्त्री ब्याह हुआ हो । पणिग्राहक । भर्ता । कांत । दूल्हा । शौहर । खाविंद । विशेष—साहित्य में पति या नायक चार प्रकार के होते हैं— अनुकूल, दक्षिण, धृष्ट और शठ । 'अनुकूल' वह पति है जो एक ही स्त्री पर पूर्णरूप से अनुरक्त हो और दूसरी की आकांक्षा तक न रखता हो । 'दक्षिण' वह है जिसके प्रणय का आधार अनेक स्त्रियाँ हों, पर जिसकी उन सबपर समान प्रीति हो अथवा जो अनेक स्त्रियों का समान प्रितिपात्र हो । 'धृष्ट' वह है जो तिरस्कार और अपमान सहकर भी अपना काम बनाता है, जिसके लज्जा और मान नहीं होता । 'शठ' वह कहलाता है जो छल कपट में निपुण हो, जो वचनचातुरी से या झूठ बोलकर अपना काम निकाले । इनके अतिरिक्त किसी-किसी आचार्य ने 'अनभिज्ञ' नाम से पति का पाँचवाँ भेद भी माना है । यह हाव भाव आधि श्रृंगार चेष्टाओं का अर्थ समझने में असमर्थ होता है ।

३. पाशुपत दर्शन के अनुसार सृष्टि, स्थिति और संहार का वह कारण जिसमें निरतिशय, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति हो और ऐश्वर्य से जिसका नित्य संबंध हो । शिव या ईश्वर ।

४. मर्यादा । प्रतिष्ठा । लज्जा । इज्जत । साख । दे॰ 'पत' । उ॰—(क) अंब पति राखि लेहु भगवान ।—सूर (शब्द॰) (ख) तुम पति राखी प्रह्लाद दीन दुख टोरा ।—गणेश प्रसाद (शब्द॰) ।

५. मूल । जड़ ।

६. गति । गमन (को॰) ।

पति ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ प्रतिष्ठा] दे॰ 'पत' । यौ॰—पतिपानी = दे॰ 'पतपानी' । उ॰—सुमिरौं मैहर कै भवानी तूँ पतिपानी राख मोर ।—प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ ४०१ ।

संज्ञा[सम्पादन]

1. एक विवाहित जोड़े में पुरुष संगी।
2. पति होना

व्युत्पन्न शब्द[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

यह भी देखिए[सम्पादन]