पनीर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पनीर संज्ञा पुं॰ [फा॰]

१. फाड़कर जमाया हुआ दूध । छेना । विशेष—इसे बनाने के लिये पहले दूध को फाड़ लेते हैं । फिर छेने में नमक और मिर्च मिलाकर साँचे में भर देते हैं जिससे उसकी चकत्तियाँ बन जाती हैं । मुहा॰—पनीर चटाना = काम निकलने के लिये किसी की खुशामद करना । हत्थे चढ़ाने के लिये किसी को परचाना । पनीर जमाना = (१) ऐसी बात करना जिससे आगे चलकर बहुत से काम निकलें । (२) किसी वस्तु पर अधिकार करने के लिये कोई आरंभिक कार्य करना ।

२. वह दही जिसका पानी निचोड़ लिया गया हो ।