परी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

परी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [फा॰]

१. फारसी की प्राचीन कथाओं के अनुसार कोहकाफ पहाड़ पर बसनेवाली कल्पित स्त्रियाँ जो आग्नेय नाम की कल्पित सृष्टि के अंतर्गत मानी गई हैं । उ॰—हेरि हिंडोर े गगन ते, परी परी सी टूटि । धरी धाय पिय बीच ही, करी खरी रस लूटि ।—बिहारी (शब्द॰) । विशेष—इनका सारा शरीर तो मानव स्त्री का सा ही माना गया है पर विलक्षणता यह बताई गई है कि इनके दोनों कंधों पर पर होते हैं जिनके सहारे ये गगनपथ में विचरती फिरती हैं । इनकी सुंदरता, फारसी, उर्दू साहित्य में आदर्श मानी गई है, केवल बहिश्तवासिनी हूरों को ही सौंदर्य की तुलना में इनसे ऊँचा स्थान दिया गया है । फारसी, उर्दू की कविता में ये सुंदर रमणियों का उपमान बनाई गई हैं । यौ॰—परीजमाल । परीजाद । परीपैकर । परीबंद । परीरू = परी की तरह । अत्यंत सुंदर ।

२. परी सी सुंदर स्त्री । परम सुंदरी । अत्यंत रूपवती । निहा- यत खूबसूरत औरत । जैसे,—उसकी सुंदरता का क्या कहना, खासी परी है ।

परी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पलिघ, हिं॰ पली] दे॰ 'पली' ।