पर्वत

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पर्वत संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. जमीन के ऊपर वह बहुत अधिक उठा हुआ प्राकृतिक भाग जो आस पास की जमीन से बहुत आधिक ऊँचा होता है और जो प्रायः पत्थर ही पत्थर होता है । पहाड़ । विशेष— बहुत आधिक उँची सम भूमि पर्व नहीं कहलाती । पर्वत उसी को कहते हैं जो आस पास की भूमि को देखते हुए बहुत अधिक उँचा हो । कई देशों में अनेक ऐसी अधित्यकाएँ या उँची समतल भूमियाँ हैं जो दूसरे देशों पहाड़ों से कम उँची नहीं हैं, परंतु न तो वे आस पास की भूमि से ऊँची हैं और लन कोणाकार; अतः वे पर्वत के अंतर्गत नहीं हैं । साधारण पर्वतों पर प्रायः अनेक प्रकार की धातुएँ, वनस्पतियाँ और वृक्ष आदि होते हैं और बहुत ऊँचे पर्वतों का ऊपरी भाग, जिसे पर्वत की चोटी या शिखर कहते हैं, बहुधा बरफ से ढँका रहता है । कुछ पर्वत ऐसे भी होते हैं जिनपर वनस्पतियाँ तो बिलकुल नहीं या बहुत कम होती हैं परंतु जिनकी चोटी पर गड़्ढा होता है, जिसमें से सदा अथवा कभी कभी आग निकला करती है; ऐसे पर्वत ज्वालीमुखी कहलाते हैं । (दे॰ ' ज्वाला- मुखी पर्वत') । पर्वत प्रायः श्रेणी के रूप बहुत दूर तक गए हुए मिलते हैं । पुराणों में पर्वतों के संबंध में अनेक कथाएँ हैं । सबसे आधिक प्रसिद्ध कथा यह है कि पहले पर्वतों के पंख होते थे । अग्नि- पुराण में लिखा है कि एक बार सब पर्वत उड़कर असुरों के निवासस्थान समुद्र में पहुँचकर उपद्रव करने लगे, जिसके कारण असुरों ने देवताओं से युद्ध ठान दिया । युद्ध में विजय प्राप्त करने के उपरांत देवताओं ने पर्वतों के पर काट दिए और उन्हें यथास्थान बैठा दिया । कालिका पुराण में लिखा है कि जगत् की स्थिति के लिये विष्णु ने पर्वतों को कामरूपी बनाया था— वे जब जैसा रूप चाहते थे, तब वैसा रूप धारण कर लेते थे । पौराणिक भूगोल में अनेक पर्वतों के नाम आए हैं और उनके विस्तार आदि का भी उनमें बहुत कुछ वर्णन हैं । वराह पुराण में लिखा है कि श्रेष्ठ पर्वतों पर देवता लोग और दूसरे पर्वतों पर दानव आदि निवास करते हैं । इसके अतिरिक्त किसी पर्वत पर नागों का, किसी पर सप्तार्षियों का, किसी पर ब्रह्मा का, किसी पर अग्नि का, किसी पर इंद्र का निवास माना गया है । पर्वत कहीं कहीं पृथ्वी को धारण करेवाले और कहीं कही उसके पति भी माने गए हैं । पर्या॰—महीध्र । शिखरी । धर । आद्रि । गोत्र । गिरि । ग्रावा । अचल । शैल । स्थावर । पृथुशेखर । धरणीकीलक । कुट्टार जीमूत । भूधर । स्थिर । कटकी । श्रृंगी । अग । नग । भूभृत । अवनीधर । कुधर । धराधर । वृत्तवानू ।

२. पर्वत की तरह किसी चीज का लगा हुआ बहुत ऊँचा ढेर । जैसे,— देखते देखते उन्होंने पुस्तकों का पर्वत लगा दिया ।

३. पुराणानुसार एक देवर्षि का नाम जिनकी नारद ऋषि के साथ बहुत मित्रता थी ।

४. एक प्रकार की मछली जिसका मांस वायुनाशक, स्निग्ध, बलवर्धक और शुक्रकारक माना जाता है ।

५. वृक्ष । पेड़ ।

६. एक प्रकार का साग ।

७. दशनामी संप्रदाय के अंतर्गत एक प्रकार के संन्यासी । ऐसे संन्यासी पुराने जमाने में ध्यान और धारण करके पर्वतों के नीचे रहा करते थे ।

८. महाभारत के अनुसार एक गंधर्व का नाम ।

९. संभूति के गर्भ से उत्पन्न मरीचि के एक पुत्र का नाम । १० सात की संख्या का वाचक शब्द (को॰) ।

पर्वत दुर्ग संज्ञा पुं॰ [सं॰] पहाड़ी किला ।