पाप

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पाप ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह कर्म जिसका फल इस लोक और परलोक में अशोक हो । वह आचरण जो अशुभ अदृष्ट उत्पन्न करे । कर्ता का अघःपात करनेवाला कर्म । ऐसा काम जिसका परिणाम कर्ता के लिये दुःख हो । ब्यक्ति और समाज के लिये अहितकर आचरण । धर्म या पुण्य का उलटा । बुरा काम । निंदित काम । अकल्याणकर कर्म । अनाचार । गुनाह । पर्या॰—अधर्म । दुर्दृष्ट । पंक । किल्विष । कल्मष । वृजिन । एनस् । अघ । अंहस् । दुष्कृत । पातक । शल्यक । पापक । विशेष—जिस प्रकार अकर्तव्य कर्म का करना पाप है, उसी प्रकार अवश्य कर्तव्य का न करना भी पाप है । धर्मशास्त्रा- नुसार निषिद्ध कार्यों अनुष्ठान और विहित कर्मों का अननुष्ठान, दोनों ही पाप हैं । पाप का फल पतन और दुख है । वह कर्ता का अनेक जन्मों में अहित करता है । पापी से संसर्ग रखनेवाला भी पापभागी और दुख का अधिकारी होता है । प्रायश्चित्त और भोग इन्हीं दो उपायों से पाप की निवृत्ति मानी गई है । यदि इन उपायों से उसके संस्कार भलो भाँति क्षीण न हुए तो वह मरणोपरांत कर्ता को नरक और जन्मांतर में अनेक प्रकार के रोग शोक आदि प्राप्त कराता है । स्वानिष्टाजनन पाप अर्थात् ऐसे पाप जिनसे तत्काल या कालांतर में केवल कर्ता का ही अनिष्ट होता है, जैसे, अभक्ष्यभक्षण, अगम्यागमन आदि, यथाविधि प्रायश्चित् त करने से नष्ट होते हैं । परंतु परानिष्टजनन पाप अर्थात् तत्काल कर्ता के अतिरिक्त किसी और व्यक्ति का और कालांतर में कर्ता का अपकार करनेवाले पाप, जैसे, चोरी, हिंसा आदि ऐसे हैं जिनके संस्कार यथोचित राजदंड भुगत लेने से क्षीण होते हैं । मनुस्मृति में लिखा है कि समाज के सामने अपना पाप प्रकट कर देने और उसके लिये अनुताप करने से वह क्षीण हो जाता है । यौ॰—पापपुण्य । मुहा॰—पाप उदय होना = संचित पाप का फल मिलना । पिछले जन्मों के पाप का बदला मिलना । कोई भारी हानि या अनिष्ट होना जिसका कारण पिछले जन्मों के बुरे कर्म समझे जायँ । जैसे,—कोई भारी पाप उदय हुआ है तभी उसको इस बुढ़ापे में लड़के का शोक सहना पड़ा है । पाप कटना = पाप का नाश होना । प्रायश्चित्त या दंडभोग से पापसंस्कारों का क्षय होना । पाप कमाना या बटोरना = पाप कर्म करना । लगातार या बहुत से पाप करना । ऐसे बुरे कर्म करते जाना जिनका फल बुरा हो । भविष्यत् या जन्मांतर में दुःख भोगने का समान करना । पाप काटना = पाप से मुक्त करना । किसी के पाप का नाश कर देना । निष्पाप करना । पापरहित कर देना । पाप की गठरी या मोट = पापों का समूह । किसी व्यक्ति के संपूर्ण पाप । किसी के जन्म भर के पाप । पाप गलना = पाप पड़ना । पाप होना । दोष होना । जैसे,—(क) पापी के संसर्ग से भी पाप लगता है । (ख) ऐसे महात्मा की निंदा करने से पाप लगता है ।

२. अपराध । कसूर । जुर्म ।

३. वध । हत्या ।

४. पापबुद्धि । बुरी नियत । बदनीयती । खोट । बुराई । जैसे,—उसके मन में अवश्य कुछ पाप है ।

५. अनिष्ट । अहित । बुराई । खराबी । नुकसान ।

६. कोई क्लेशदायक कार्य कार्य या विषय । परेशान करनेवाला काम या बात । बखेड़े का काम । झंझट । जंजाल । (केवल हिंदी में प्रयुक्ति) । मुहा॰—पाप कटना = बाधा कटना । झगड़ा दूर होना । जंजाल छूटना । जैसे,—वह आप ही यहाँ से चला गया अच्छा हुआ, पाप कटा । पाप काटना = झगड़ा मिटाना । बला काटना । जंजाल छुड़ाना । पाप मोल लेना = जान बूझकर किसी बखेड़े के काम में फँसना । दर्द सर खरीदना । झगड़े में पड़ना । पाप गले या पीछे लगना = अनिच्छापूर्वक किसी बखेड़े या झंझट के काम में बहुत समय के लिये फँस जाना । कोई बाधा साथ लगना ।

७. कठइनाई । मुश्किल । संकट । (क्व॰) । मुहा॰—पाप पड़ना पु—सामर्थ्य से बाहर हो जाना । मुश्किल पड़ जाना । कठिन हो जाना । उ॰—सीरे जतननि सिसिर ऋतु सहि बिरहिन तनु ताप । बसिबे को ग्रीषम दिननि परयो परोसिनि पाप ।—बिहारी (शब्द॰) ।

८. पापग्रह । क्रूरग्रह । अशुभग्रह ।

पाप ^२ वि॰

१. पापयुक्त । पापिष्ठ । पापी ।

२. दुष्ट । दुरात्मा । दुराचारी । बदमाश ।

३. नीच । कमीना ।

४. अशुभ । अमंगल । विशेष—पाप शब्द का विशेषण के रूप में अकेले केवल संस्कृत में व्यवहार होता है । हिंदी में वह समास के साथ ही आता है । जैसे, पापपुरुष, पापग्रह, आदि ।