पाला

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पाला ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रालेय]

१. हवा में मिली हुई भाप के अत्यंत सूक्ष्म अणुओं की तह जो पृथ्वी के बहुत ठंढा हो जाने पर उसपर सफेद सफेद जम जाती है । हिम । उ॰— जल तें पाला, पाला तें जल, आतम परमातम इकलास ।—सुंदर॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ १५६ । क्रि॰ प्र॰—गिरना ।—पड़ना । मुहा— पाला पड़ना = दे॰ 'पाला मार जाना' । पाला मार जाना= पौधे या फसल का पाला गिरने से नष्ट हो जाना । पाला मारना = दे॰ 'पाला मार जाना' ।

२. हिम । ठंढ से ठोस जमा हुआ पानी । बर्फ ।

३. ठंढ । सरदी । शीत ।

पाला ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पल्ला] संबंध का अवसर । लगाव का मौका । व्यवहार करने का संयोग । वास्ता । साबिका । विशेष— यह शब्द केवल 'पड़ना' के साथ मुहा॰, के रूप में आता है । जैसे,— खूबों को जानता था गरमी करेंगे मुझसे । दिल सर्द हो गया है जब से पड़ा है पाला ।—कविता कौ॰, भा॰ ४, पृ॰ ९ । मुहा॰— (किसी से) पाला पड़ना = व्यवहार करने का संयोग होना । वास्ता पड़ना । काम पड़ना । जेसे,—बड़े भारी दुष्ट से पाला पड़ा है । (किसी के) पाले पड़ना = वश में होना । काबू में आना । पकड़े में आना । उ॰—(क) परेहु कठिन रावण के पाले ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) जो सदा मारते रहे पाला । वे पड़े टालटूल के पाले ।— चुभते॰, पृ॰ २५ ।

पाला ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पल्लव, हिं॰ पाली] झड़बेरी की पत्तियाँ जो राजपूताने आदि में चारे के काम में आती हैं ।

पाला ^४ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पट्ट हिं॰ पाड़ा]

१. प्रधान स्थान । पीठ । सदर मुकाम ।

२. सीमा निर्दिष्ठ करने के लिये मिट्टी का उठाया हुआ मेड़ या छोटा भीटा । धुस ।

३. कबड़्डी के खेल में हद के निशान के लिये उठाया हुआ मिट्टी का धुस या खींची हुई लकीर । मुहा॰— पाला मारना = कबड्डी के खेल में सभी प्रतिपक्षियों को हराना । उ॰— जो सदा मारते रहे पाला । वे पड़े टालटूल के पाखे ।— चुभते॰, पृ॰ १५१ ।

४. अनाज भरने का बड़ा बरतन जो प्राया कच्ची मिट्टी का गोल दीवार के रूप में होता है । डेहरी ।

५. अखाड़ा । कुश्ती

पाला पु ^५ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पालक, प्रा॰, पालय, हिं॰ पालना] दे॰ 'पालक' । उ॰— पुहविए पाला आवन्ता ।—कीर्ति॰, पृ॰ ४६ ।